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#1
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उलझनों में जकडा
कभी इधर खीचता कभी उधर मंज़िल मालूम है लेकिन रास्तों से अनजान हूँ प्यास से तिलमिलाता कभी इधर भटकता कभी उधर कुआ मालूम है लेकिन रास्तों से अनजान हूँ परेशानियों से छिपकर कभी इधर ठोकर खाता कभी उधर ऊपाय मालूम है लेकिन रास्तों से अनजान हूँ मझधार में फँस्कर कभी इधर गोता खाता कभी उधर किनारा मालूम है लेकिन रास्तों से अनजान हूँ दिल के हाथों चोट खाकर कभी इधर सीसकता कभी उधर मेह्खाना मालूम है लेकिन रास्तों से अनजान हूँ गगन में उड़ता कभी इधर सरसराता कभी उधर क्षितिज मालूम है लेकिन रास्तों से अनजान हूँ प्यार के गलियारों में कभी इधर खोजता कभी उधर ठिकाना मालूम है लेकिन रास्तों से अनजान हूँ मौत के सागर में कभी इधर डूबता कभी उधर अंजाम मालूम है लेकिन रास्तों से अनजान हू Also on Billionaire's Hub |